नाशिक कुंभमेला


नाशिक कुंभमेला

कुंभ मेला भारत का पवित्र त्योहारों में से एक है और एक बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है। विद्वानों के अनुसार, माना गया है कि, जब देवताओं और दानवों के बीच अमृत को लेकर लड़ाई हुई तब भगवान विष्णु अमृत के बर्तन के साथ दूर उड़ गये तब चार अलग अलग स्थानों पर अमृत की बूँदें गिर गयीं; हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयाग ये वो चार स्थान है जहां अमृत कि बूँदें गीरी थी| इन्हीं जगहोंपे हम कुंभ के मेले का पर्व मनाते है|

कुंभ मेलेका उत्सव सूर्य और बृहस्पति की स्थिति पर निर्भर करता है। जब सूर्य मेष राशि और बृहस्पति कुंभ राशि में आता है, तब यह हरिद्वार में मनाया जाता है। जब बृहस्पति वृषभ राशि में है और सूर्य मकर राशि में होताआता है, तो कुंभ प्रयाग में मनाया जता है। मेला उज्जैन में मनाया जाता है जब बृहस्पति और सूर्य वृश्चिक राशि में आते हैं। यह कहा जाता है कि जब बृहस्पति और सूर्य राशि चक्र चिन्ह, सिंह राशि तब कुंभ मेला नाशिक में त्र्यंबकेश्वर में मनाया जाता है।

कुंभ मेला बड़ी धूमधाम और प्रदर्शन के साथ मनाया जाता है,बड़ी भीड़ उमड़ पड़ती है, ये द्रुश्य श्वास रोखनेवला होता है| भक्त एकत्र आके कई संस्कार और अनुष्ठान करते हैं। अनेक धार्मिक-विधि मनये जाते है, जैसे धार्मिक विचार विमर्श,भक्ति गायन, बड़े पैमाने पर पवित्र पुरुषों और महिलाओं और गरिबोंको भोजन का आयोजन , जहां कुंभ मनाया जाता है वहाँ नदि में स्नान करना सबसे पवित्र माना जाता है|

कुंभ मेला त्र्यंबकेश्वर में मनाया जाता है। जो नासिक महाराष्ट्र में है| त्र्यंबकेश्वर नाशिक का एक पवित्र स्थान है जहाँ पे बारा ज्योतिर्लिंगोंमें से एक त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर स्थित है| नासिक में कुंभ मेला हर बारह साल में एक बार मनाया जाता है और सिंहस्थ के रूप में जाना जाता है।

पौराणिक कथाएँ और महाकाव्यों के श्लोक के अनुसार, उद्भूत मंथन के बाद जब भगवान विष्णु अमृत के साथ पृथ्वी से स्वर्ग में उड़ गये तब अमृत की बूँदें नासिक में गोदावरी नदी पर गिर गयीं| इसी कारण से हिंदुओं में इन जगहको पवित्र माना जाता है| माघ के चंद्र मास में जब सूर्य और बृहस्पति राशि चक्र चिन्ह (सिंह राशि) में आते है तब नासिक में त्र्यंबकेश्वर में कुंभ मेला आयोजित है।

नासिक में कुंभ मेला बड़ी उत्सुकता, जज़्बासे मनाया जाता है| यहाँ पे बड़े पैमाने पर तीर्थयात्रि उनके पापों को दूर करने के लिए पवित्र नदी गोदावरी में स्नान करते है| साधु, पवित्र पुरुष और तीर्थयात्रि विशिष्ट तिथि पर विशिष्ट समय में पवित्र नदी गोदावरी में स्नान करते है| रामकुंड और कुशावर्त इन दो पवित्र जलाशयोंमें (स्नान घाटोमें) आस्था और विश्वास के साथ स्नान करते है| प्रशासन उन विशेष तारीखों पे तीर्थयात्रियों के आवास की सुविधा और इतर सुविधा की व्यवस्था करता है| इस त्योहार के मौसम का परिदृश्य देखने के काबिल है।

नासिक कुंभमेला मंगलवार (14/07/2015) को शके 1937 आषाढ निज़ वद्य तृतीय , 00.07 पर शुरू होता है। और यह गुरुवार को (11/08/2016)शके 1938 श्रवण अष्टमी (8 दिन) पर 07.26 पर समाप्त होता है।



शाही स्नान

शाही स्नान दिन और तारीख
पेहेला शाही स्नान शके 1937 श्रवण शुद्ध पूनम, शनिवार, 29/08/2015
दूसरा शाही स्नान शके 1937 मिति श्रवण कृष्ण अमावस्या,रविवार, 13/09/2015
तीसरा शाही स्नान शके 1937 मिति भद्रपद शुद्ध द्वादशि (वामानद्वादशि), शुक्रवार , 25/09/2015



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