हम सभी पूजा जन्मकुंडली के अनुसार करतें हैं , कृपया अपने साथ जन्मकुंडली लाएं|

कालसर्प पूजा

जन्म कुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के एक ही और स्िथत हों तो ऐसी ग्रह स्थिती को कालसर्प योगकहते है। कालसर्प योग एक कष्ट कारक योग है। राहु के गुण -अवगुण शनि जैसे हैं ।राहु जिस स्थान में जिस ग्रह के योग में होगा,   उसका व शनि का फल देता है।

पितृदोष पूजा

नारायण नागबलि ये दोनो विधी मानव की अपूर्ण इच्छा , कामना पूर्ण करने के उद्देश से किय जाते है इसीलिए येदोने विधी काम्यू कहलाते है। नारायणबलि और नागबपलि ये अलग-अलग विधीयां है। नारायण बलि का उद्देश मुखत:पितृदोष निवारण करना है ।

रूद्र अभिषेक

रुद्र अभिषेक जहां पंचामृत पूजा मंत्रोच्चारण के साथ त्र्यंबकेश्वर भगवान को अर्पण किया जाता है इससे उस व्यक्ति की सभी मनोकामना पुर्ण होती है। तथा नकारात्मक छटा का नाश और जीवन में सभी ओर खुशी मिलती है



नाशिक (त्रिम्बकेश्वर) कुम्भमेला

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पंडितजी के बारेमे

पिंगळे परिवार ३५० वर्षसे श्रीक्षेत्र त्र्यंबकेश्वर में पाच आळी, परशुराम मंदिर , पिंगळे वाडा यहाँपे वास्तव्य कर रहे है|

कालसर्प शांती पुजाकी संकल्पना हमरे दादा (श्री .पद्माकर भास्कर पिंगळे इनके काकाजी )वे .शा. सं . कै.पुरुषोत्तम त्र्यंबक इन्होने प्रथम 60 सालोंके पेहेले लिखी|

उन्होनेहि संपूर्ण पोथी लिखकर शास्त्रोक्त पद्धतीसे कालसर्प शांती की शुरुवात त्र्यंबकेश्वर में की| आज संपूर्ण त्र्यंबकेश्वरमें यह विधि किया जाता है| ब्रम्हा, विष्णू, महेशएकहि स्थान्मे होने के कारण इस विधि को विशेष महत्व है|

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